खटीमा नगर पालिका में 7 रेन वाटर हार्वेस्टिंग टेंडरों में करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप, उच्च स्तरीय जांच की मांग…………..
खटीमा/देहरादून। नगर पालिका परिषद खटीमा में वर्ष 2026 में जारी किए गए सात रेन वाटर हार्वेस्टिंग परियोजनाओं के टेंडरों को लेकर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं, पक्षपात, मिलीभगत और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप सामने आए हैं। शिकायतकर्ता अक्षय शर्मा द्वारा उत्तराखंड शासन को सौंपे गए विस्तृत शिकायत पत्र में नगर पालिका खटीमा की टेंडर समिति, अधिशासी अधिकारी प्रियंका आर्या तथा हिमालया एंटरप्राइजेज के स्वामी मोनीस हसन पर करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगाया गया है।
₹3.10 करोड़ के 7 टेंडरों में अनियमितता का आरोप………………….
नगर पालिका परिषद खटीमा की टेंडर समिति और अधिशासी अधिकारी (EO) प्रियंका आर्या पर सात रेन वाटर हार्वेस्टिंग परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं। इस संबंध में उत्तराखंड शासन को भेजी गई शिकायत में करोड़ों रुपये के टेंडरों में पक्षपात, मिलीभगत, पात्रता नियमों की अनदेखी और प्रतिस्पर्धा को सीमित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
7 रेन वाटर हार्वेस्टिंग टेंडरों पर सवाल………..
शिकायत के अनुसार 21 अप्रैल 2026 को नगर पालिका खटीमा द्वारा सात रेन वाटर हार्वेस्टिंग परियोजनाओं के लिए GeM पोर्टल पर निविदाएं जारी की गईं, जिनकी अनुमानित लागत लगभग 3.10 करोड़ रुपये बताई गई। बाद में 4 जून 2026 को इन्हीं कार्यों के लिए कार्यादेश जारी कर दिए गए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पूरी प्रक्रिया पूर्व निर्धारित तरीके से पसंदीदा ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित की गई।
DPR को वास्तविक लागत से तीन गुना बढ़ाने का आरोप………..
शिकायत में कहा गया है कि सातों परियोजनाओं की DPR वास्तविक लागत की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक तैयार की गई। आरोप है कि कार्यों में 50 प्रतिशत तक कमीशनखोरी की संभावना है, जिसके कारण सरकारी धन की बड़ी हानि हो सकती है। शिकायतकर्ता ने DPR की स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय ऑडिट कराने की मांग की है।
साइट विजिट को बनाया गया तकनीकी अयोग्यता का हथियार?
टेंडर की शर्त संख्या-3 के अनुसार सभी बोलीदाताओं के लिए साइट विजिट और साइट विजिट प्रमाणपत्र अनिवार्य था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नगर पालिका ने केवल तीन फर्मों—हिमालया एंटरप्राइजेज, मंजूर हसन खान और साहिबदीप कंस्ट्रक्शन—को ही साइट विजिट प्रमाणपत्र जारी किए, जबकि अन्य इच्छुक फर्मों को यह सुविधा नहीं दी गई।
शिकायतकर्ता के अनुसार M/s ACE Enterprises ने 4 और 5 मई 2026 को साइट विजिट के लिए आवेदन किया, लेकिन उन्हें प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया। परिणामस्वरूप वे तकनीकी मूल्यांकन में बाहर हो गए। इसे प्रतिस्पर्धा समाप्त करने और पसंदीदा ठेकेदार को लाभ पहुंचाने की साजिश बताया गया है।

केवल तीन फर्मों को तकनीकी रूप से योग्य घोषित करने पर सवाल…………..
छह प्रतिभागी फर्मों में से टेंडर समिति द्वारा केवल तीन फर्मों—हिमालया एंटरप्राइजेज, मंजूर हसन खान और साहिबदीप कंस्ट्रक्शन—को तकनीकी रूप से योग्य घोषित किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यह निर्णय निष्पक्षता और पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत था।
एक ही परिवार की दो फर्मों की भागीदारी पर विवाद…………..
शिकायत पत्र में दावा किया गया है कि M/s Himalaya Enterprises मोनीस हसन के नाम से तथा M/s Manjoor Hasan Khan उनके पिता मंजूर हसन खान के नाम से पंजीकृत है। आरोप है कि एक ही परिवार की दो फर्मों ने एक ही टेंडर प्रक्रिया में भाग लेकर प्रतिस्पर्धा को प्रभावित किया, जिसकी जांच आवश्यक है।
GST निलंबित होने के बावजूद टेंडर देने का आरोप…………
सबसे गंभीर आरोपों में से एक यह है कि हिमालया एंटरप्राइजेज का GST पंजीकरण 31 मार्च 2026 से निलंबित था, फिर भी फर्म को पात्र घोषित कर करोड़ों रुपये के कार्य आवंटित कर दिए गए। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि जब टेंडर शर्तों में GST अनुपालन अनिवार्य था, तब निलंबित GST वाली फर्म को योग्य कैसे माना गया।
कंपोजिशन स्कीम वाली फर्म की पात्रता पर प्रश्न………..
दूसरी फर्म M/s Manjoor Hasan Khan GST Composition Scheme के अंतर्गत पंजीकृत बताई गई है। शिकायत में कहा गया है कि सक्षम प्राधिकारी यह जांच करे कि क्या यह फर्म वास्तव में टेंडर की सभी पात्रता शर्तों को पूरा करती थी या नहीं।
किच्छा नगर पालिका के पुराने टेंडरों का भी जिक्र………….
शिकायत में वर्ष 2025 में किच्छा नगर पालिका के पांच रेन वाटर हार्वेस्टिंग कार्यों का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि हिमालया एंटरप्राइजेज ने कथित रूप से फर्जी FDR के आधार पर कार्य प्राप्त किए थे। शिकायतकर्ता ने GeM पोर्टल पर अपलोड दस्तावेजों तथा नगर पालिका अभिलेखों की तुलना कर जांच कराने की मांग की है।
एक ही FDR कई टेंडरों में उपयोग करने का आरोप…………….
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2024 और 2025 के विभिन्न टेंडरों में एक ही FDR का बार-बार उपयोग किया गया। यदि यह तथ्य सही पाया जाता है तो यह निविदा प्रक्रिया में गंभीर वित्तीय अनियमितता और दस्तावेजी धोखाधड़ी का मामला बन सकता है।
कार्य तीसरी फर्म को ट्रांसफर करने का आरोप………….
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि किच्छा नगर पालिका के तीन रेन वाटर हार्वेस्टिंग कार्य बाद में M/s ESEN INC नामक तीसरी फर्म को हस्तांतरित या सब-कॉन्ट्रैक्ट कर दिए गए। शिकायत में कहा गया है कि यदि बिना सक्षम स्वीकृति के ऐसा किया गया है तो यह टेंडर नियमों का उल्लंघन हो सकता है।
भुगतान रोकने और उच्च स्तरीय जांच समिति बनाने की मांग……………
शिकायतकर्ता ने शासन से मांग की है कि खटीमा नगर पालिका द्वारा जारी सातों कार्यादेशों तथा उनसे संबंधित सभी भुगतानों पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही एक उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच समिति गठित कर पूरे मामले की तकनीकी, वित्तीय और प्रशासनिक जांच कराई जाए।
शिकायतकर्ता की प्रमुख मांगें
सातों रेन वाटर हार्वेस्टिंग टेंडरों की स्वतंत्र जांच।
DPR और लागत निर्धारण का तकनीकी ऑडिट।
FDR, बैंक गारंटी और सुरक्षा जमा की जांच।
GST, पात्रता और तकनीकी दस्तावेजों का सत्यापन।
दोषी पाए जाने पर अधिकारियों एवं ठेकेदारों के विरुद्ध विभागीय और कानूनी कार्रवाई।
संबंधित फर्मों को ब्लैकलिस्ट करने पर विचार।
प्रशासन का पक्ष प्रतीक्षित
उक्त आरोप शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए हैं। समाचार लिखे जाने तक नगर पालिका परिषद खटीमा, अधिशासी अधिकारी प्रियंका आर्या अथवा संबंधित फर्मों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी है। मामले की सत्यता सक्षम जांच एजेंसी द्वारा की जाने वाली जांच के बाद ही स्थापित हो सकेगी।
(यह समाचार शिकायत पत्र में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही मानी जाएगी।)




